2025 की शुरुआत में, जब कई परिवार अभी भी बढ़ती पढ़ाई की लागत और डिजिटल गैजेट्स के दाम से जूझ रहे थे, तभी केंद्र और कुछ राज्य सरकारों की फ्री लैपटॉप योजना ने छात्रों के बीच एक नई हलचल पैदा कर दी। यूपी, एमपी और राजस्थान में इसके लागू होने के बाद स्कूलों के बाहर जो उत्साह दिखा वह इस बात का साफ संकेत है कि डिजिटल संसाधन अब लक्जरी नहीं, बल्कि पढ़ाई का आधार बन चुके हैं। कई विद्यार्थियों ने बताया कि लैपटॉप मिलना उनके लिए उतना ही बड़ा है जितना पहली बार स्कूल बैग खरीदना—ज़रूरी और सपनों से जुड़ा हुआ।
किन राज्यों में मिल रहा है फ्री लैपटॉप या ₹25,000 की मदद?
अगर आप किसी ऐसे घर से आते हैं जहाँ लैपटॉप खरीदना बड़े फैसलों की तरह महसूस होता है, तो यह योजना आपके लिए मायने रखती है। तीन राज्यों ने इस साल अलग-अलग मॉडल अपनाए हैं—कहीं सीधे लैपटॉप, तो कहीं नकद सहायता। और हाँ, यह सब मेरिट और निवास मानदंड पर टिका है।
उत्तर प्रदेश
यूपी सरकार लैपटॉप सीधे छात्रों को उपलब्ध करा रही है।
ज़रूरी शर्त: 60% या उससे अधिक अंक।
यह मॉडल उस परिवार के लिए उपयोगी है जिसे डर रहता है कि नकद राशि कहीं किसी और जरूरी खर्च में न लग जाए। मशीन मिलते ही मामला साफ—सीधे पढ़ाई।
मध्य प्रदेश
एमपी सरकार का यह मॉडल थोड़ा अलग है।
12वीं बोर्ड में 85% से ऊपर लाने वाले छात्रों को ₹25,000 प्रदान किए जा रहे हैं।
यानी विकल्प आपके हाथ में—चाहें तो खुद लैपटॉप खरीदें, या जरूरत हो तो अन्य शैक्षणिक खर्च पर भी लगाएं।
राजस्थान
राजस्थान का मॉडल यूपी जैसा है।
75% या उससे अधिक अंक लाने वाले छात्रों को सरकार मुफ्त लैपटॉप देती है।
राज्य की पंचायतों और स्कूलों में इसका अच्छा रिस्पॉन्स देखने को मिल रहा है—लोग इसे “डिजिटल स्कॉलरशिप” कहकर भी बुलाने लगे हैं।
राज्यवार तुलना: एक संक्षिप्त नजर
| राज्य | क्या मिलता है | न्यूनतम अंक | किसे फायदा |
|---|---|---|---|
| उत्तर प्रदेश | फ्री लैपटॉप | 60% | 10वीं/12वीं पास छात्र |
| मध्य प्रदेश | ₹25,000 की मदद | 85% | 12वीं बोर्ड टॉपर्स/मेधावी |
| राजस्थान | फ्री लैपटॉप | 75% | 10वीं/12वीं में मेरिट छात्र |
कौन ले सकता है इसका लाभ?
यह बात कई माता-पिता समझ नहीं पाते कि जरूरी सिर्फ अंक नहीं होते—कुछ अन्य पात्रता शर्तें भी उतनी ही अहम हैं। क्योंकि कई राज्यों में आवेदन इसी वजह से अटक जाते हैं।
प्रमुख पात्रता शर्तें:
- छात्र उसी राज्य का स्थायी निवासी हो जहाँ योजना लागू हो।
- 9वीं, 10वीं या 12वीं किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से पास होना अनिवार्य।
- न्यूनतम अंक राज्य के अनुसार पूरे करना (UP – 60%, MP – 85%, Rajasthan – 75%)।
- छात्र का बैंक खाता आधार से लिंक हो।
- किसी अन्य योजना में गलत जानकारी देने पर पात्रता खत्म हो सकती है।
- स्कूल/कॉलेज का बोनाफाइड प्रमाणपत्र कुछ जगह जरूरी होता है।
मेरे एक परिचित शिक्षक का कहना था कि कई योग्य छात्र सिर्फ इसलिए रह जाते हैं क्योंकि बैंक खाता वाला हिस्सा अधूरा होता है। इसलिए दस्तावेज़ों की तैयारी पहले से कर लेना बेहतर होता है।
कौन-कौन से दस्तावेज़ जरूरी हैं?
अक्सर बच्चे गलती यहीं करते हैं—मार्कशीट ठीक से स्कैन नहीं होती, फोटो धुंधली होती है, या निवास प्रमाणपत्र पुराना रहता है। आवेदन रिजेक्ट होने का सबसे बड़ा कारण दस्तावेजों की गलत अपलोडिंग है।
ज़रूरी दस्तावेजों की सूची:
- आधार कार्ड
- 10वीं/12वीं की मार्कशीट
- निवास प्रमाण पत्र
- बैंक पासबुक की कॉपी
- पासपोर्ट साइज फोटो
- मोबाइल नंबर और ईमेल
- जाति प्रमाण पत्र (जहाँ लागू हो)
इनमें से तीन चीज़ें सबसे ज्यादा अहम मानी जाती हैं—निवास, बैंक विवरण और मार्कशीट।
आवेदन कैसे करें? (एक सरल स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)
आवेदन प्रक्रिया सुनने में भारी लगती है, लेकिन वास्तव में यह उतनी कठिन नहीं है। सरकारों ने पोर्टल को ऐसे डिज़ाइन किया है कि साधारण इंटरनेट उपयोगकर्ता भी इसे आसानी से चला सके।
आवेदन प्रक्रिया:
- अपने राज्य के शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट खोलें।
- “Free Laptop Yojana 2025” या इसी नाम के विकल्प पर क्लिक करें।
- आवेदन फॉर्म में नाम, माता-पिता का नाम, स्कूल, प्राप्त अंक, पासिंग ईयर और बैंक विवरण भरें।
- मांगे गए दस्तावेज़ साफ-सुथरे तरीके से स्कैन करके अपलोड करें।
- आवेदन सबमिट करने के बाद आपको एक एप्लिकेशन नंबर मिलेगा।
- वही नंबर आपको स्टेटस ट्रैक करने के काम आएगा।
- अंतिम चयन के बाद या तो लैपटॉप वितरण सूची में नाम आएगा या एमपी की तरह राशि DBT के जरिए खाते में भेज दी जाएगी।
कई राज्यों में स्कूल स्तर पर ही छात्रों का सत्यापन किया जाता है, ताकि गलत जानकारी देने वालों को शुरुआत में ही फिल्टर किया जा सके।
डिजिटल बदलाव का असली असर कहाँ दिख रहा है?
जब महामारी के बाद डिजिटल पढ़ाई आम हुई, तब कई परिवारों ने दर्दनाक अनुभव साझा किए—एक लैपटॉप पर तीन बच्चों की पढ़ाई, मोबाइल के डेटा की कमी, और कई बार महज एक खराब नेटवर्क के कारण पूरे साल की तैयारी बिगड़ जाना। यही कारण है कि 2025 की इन योजनाओं का असर जमीन पर बेहद सकारात्मक दिख रहा है।
राजस्थान के एक ग्रामीण इलाके में एक छात्रा ने बताया कि उसे मिला लैपटॉप सिर्फ पढ़ाई नहीं बल्कि करियर बदलने का मौका दे गया। उसने कहा, “पहले मैं डॉक्टर बनना चाहती थी, अब मुझे कंप्यूटर साइंस में भी दिलचस्पी हो गई है।”
एमपी के एक छात्र ने ₹25,000 की राशि से लैपटॉप खरीदकर कोडिंग सीखना शुरू कर दिया। उसके शिक्षक बताते हैं कि यह बदलाव तभी संभव है जब डिजिटल संसाधन छात्रों की पहुंच में आएं।
क्यों इस योजना की देश के लिए भी बड़ी अहमियत है?
भारत डिजिटल इकोनॉमी की ओर तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन डिजिटल डिवाइड—यानी तकनीक की उपलब्धता में असमानता—हमेशा एक बड़ी चुनौती रही है। फ्री लैपटॉप योजना इस गैप को पाटने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
यह सिर्फ उपकरण देने की बात नहीं है, यह उन छात्रों को प्लेटफॉर्म देने की बात है जो आगे चलकर देश की तकनीकी शक्ति बनेंगे।
चाहे AI, प्रोग्रामिंग, ग्राफिक डिज़ाइन या किसी भी डिजिटल कौशल की बात हो—लैपटॉप शुरुआत का पहला दरवाज़ा है।
हाँ, यह दावा सच है।
2025 में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में अलग-अलग स्वरूप में फ्री लैपटॉप या आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।
हालाँकि:
- यह केंद्र सरकार की एक संयुक्त राष्ट्रीय योजना नहीं है।
- हर राज्य अपने बजट और नियमों के अनुसार इसे चला रहा है।
- राशि और पात्रता दोनों स्थान-स्थान पर अलग हैं।
इसलिए छात्रों को अपने ही राज्य के नियम ध्यान से पढ़ने होते हैं।
निष्कर्ष
अगर आप उन छात्रों में हैं जो सही अंक लाने के बाद भी डिजिटल संसाधनों की कमी के कारण सीमित महसूस करते हैं, तो यह योजना आपके लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। चाहे लैपटॉप मिले या ₹25,000—दोनों ही आपके करियर को दिशा देने वाले संसाधन हैं।
और हाँ, एक बात हमेशा याद रखें डॉक्यूमेंट्स सही हों, आवेदन समय पर हो, और अंक मेरिट के अनुसार। बाकी काम सरकार कर देगी।
